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जल महोत्सव व्याख्यान में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि पद्धतियों का प्रदर्शन किया गया

जल महोत्सव के उपलक्ष्य में, लद्दाख में अपशिष्ट जल के उपयोग से हाइड्रोपोनिक तकनीक पर तकनीकी सहायक (द्वितीय) और ग्रामीण प्रौद्योगिकी प्रभारी डॉ. ललित गिरि ने व्याख्यान दिया। उन्होंने तकनीक की पूरी प्रक्रिया समझाई और स्थानीय समुदाय के लिए इसके लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह तकनीक अपशिष्ट जल के उपयोग और कृषि उत्पादन के लिए एक प्रभावी विकल्प है, विशेष रूप से लद्दाख के दुर्गम भूभाग में। इसके अलावा, उन्होंने चीड़ की पत्तियों से मल्चिंग करने की विधि भी प्रस्तुत की। उन्होंने समझाया कि प्लास्टिक मल्चिंग के बजाय चीड़ की पत्तियों का उपयोग पर्यावरण के अनुकूल है और पारिस्थितिक संरक्षण में सहायक है। चीड़ की पत्तियों से मल्चिंग द्वारा प्राप्त उपज की तुलना जब प्लास्टिक मल्चिंग से की गई, तो परिणाम प्लास्टिक मल्चिंग के लगभग समान थे। यह विधि जंगलों में चीड़ की पत्तियों के जमाव को कम करने में भी सहायक हो सकती है, जो वन अग्नि के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अतिरिक्त, यह जल संरक्षण और सतत कृषि के लिए भी उपयोगी है। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक-ई डॉ. एस.सी. आर्य ने जल के महत्व पर जोर देते हुए सभी से जल संरक्षण के हर संभव प्रयास का आग्रह किया, क्योंकि जल जीवन के लिए अत्यंत अनमोल है। उन्होंने जल के सतत उपयोग को प्रोत्साहित किया और दैनिक जीवन में जल संरक्षण की अच्छी आदतें अपनाने की सलाह दी। शिक्षक, शोधार्थी और सहायक कर्मचारी इस व्याख्यान में उपस्थित रहे। #जलमहोत्सव2026 #जलअर्पणदिवस #मिशनलाइफ #हरघरजल



दिनांक: 19th Mar 2026